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भजन संध्या और चारधाम एपिसोड पर कटघरे में सरकार

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-लोक गायकों ने बताई खुद की घोर उपेक्षा, जनप्रतिनिधियों का धन के दुरूपयोग का आरोप
-उखीमठ आपदा पीडि़तों का सरकार से सवाल हमारे लिए क्यों नहीं एक-एक लाख ?

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में कलैष खैर की भजन संध्या और चारधाम एपिसोड पर दस करोड़ खर्च होने का मामला सामने आते ही लोक कलाकारों और जनप्रतिनिधियों के साथ ही आपदा पीडि़तों ने सरकार और मुखिया हरीष रावत को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोक गायक सरकार के इस आयोजन को जहां खुद के साथ भद्दा मजाक बता रहे हैं, वहीं ऊखीमठ के आपदा पीडितों ने सरकार से जवाब मांगा है कि कैलाष खैर के कार्यक्रम के लिए दस करोड और उनके लिए एक लाख रूपए क्यों नहीं?
केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के बाद अब सूफी गायक कैलाष खैर की भजन संध्या और उनके द्वारा बनाए गये चारधाम एपिसोड को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निषान खडे़ होने लगे हैं। जहां पहले पुनर्निर्माण कार्यों में करोड़ों रूपए के घोटाले को लेकर सरकार की छवि पर सवाल उठे थे, वहीं अब मुख्यमंत्री हरीष रावत द्वारा केदारनाथ में सूफी गायक कैलाष खैर की भजन संध्या के साथ ही चारधाम यात्रा के प्रमोषन के लिए दस करोड रूपए बहाए गये हैं। गत् दिनों कैलाष खैर केदारनाथ में चंद मिनटों की भजन संध्या कर लौटे थे। खैर की कम्पनी मैसर्स कैलाष इंटरटेनमेंट द्वारा 44 मिनट के 12 एपिसोड चारधाम यात्रा पर बनाए गये हैं। इसकी कुल लागत दस करोड़ के करीब है। करोड़ों के आयोजन के लिए प्रदेष सरकार और उसके मुखिया भले ही इसे बड़ी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, मगर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, लोक कलाकारों और आपदा पीडि़तों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
स्थानीय कलाकारों का आरोप है कि मुख्यमंत्री हमेषा स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की बात करते हैं, लेकिन करोड़ों रूपए बाहरी कलाकारों को देकर अपने लोक कलाकारों को पीछे किये जा रहा है। लोक गायक विक्रम कप्रवाण व हेमा नेगी करासी का कहना है कि सरकार को केदारनाथ में अपने उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों को मौका देना चाहिए था और जो करोड़ों रूपए बाहर के कलाकार ले गए, उससे कई कम कीमत में स्थानीय लोक कलाकार आयोजन करते। उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों के साथ बड़ा धोखा है। वहीं आपदा पीडित तो सरकार और मुख्यमंत्री से सीधे सवाल कर रहे हैं। ऊखीमठ त्रासदी के पीडितों का साफ आरोप है कि वर्ष 2012 की आपदा में उनके भवन ध्वस्त हो गए थे और भारी जनहानि उन्होंने झेली, मगर सीएम के पास उनके लिए एक-एक लाख रूपए देने के लिए नहीं है। लेकिन केदारनाथ धाम में भजन संध्या और सीरियल बनाने पर करोड़ों रूपए खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कई बार उन्हें एक-एक लाख देने का आष्वासन दिया, लेकिन अभी एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है। हां यह जरूर है कि उनके बदले का पैंसा बाहरी लोगों पर पानी का तरह बहाया जा रहा है।
वहीं विपक्षी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने साफ तौर से सरकार और मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा किया है। भाजपा प्रदेष प्रवक्ता वीरेद्र बिष्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है। एक ओर कोदा झंगोरा की बात करते हैं और दूसरी तरफ बाहरी लोगों पर करोड़ों रूपए बहाए जा रहे हैं। कहा कि जो पैंसा आपदा पीडि़तों को मिलना था, वह पैंसा महोत्सव और भजन संध्या तथा सीरियलों पर उडाया जा रहा है। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष राकेष नौटियाल और नगर पंचायत अध्यक्ष अगस्त्यमुनि अषोक खत्री का कहना है कि आज भी कई आपदा पीडि़त परिवारों के पास रहने के लिए मकान नहीं है और रोजगार की तलाष में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार और उसके मुखिया अपनी राजनीति चमकाने के लिए राजकोश का दुरूपयोग कर रहे हैं। सीएम को सोचना चाहिए कि पहले उखीमठ आपदा पीडितों का मुआवजा जरूरी है या फिर कैलाष खैर के भजन और एपिसोड।
इस मामले में जिलाधिकारी डॉ राघव लंगर का कहना है कि चारधाम यात्रा का प्रमोशन के लिए मैसर्स कैलाश इन्टरटेनमेंट कम्पनी को अब तक 50 प्रतिशत का भुगतान आपदा प्रबन्धन विभाग से हो चुका है। शासन स्तर पर इस कार्यक्रम को लेकर निविदायें आमंत्रित की गयी थी। जिसमें 12 ऐपिसोड 44 मिनट के बनाये जाने थे। वर्तमान समय में सभी ऐपिसोड बनकर तैयार हो चुके हैं। जिसका प्रमोषन उत्तराखण्ड सचिवालय में पूर्व में किया गया है। कार्यक्रम को लेकर षासन स्तर पर कैबिनेट बुलाकर एक उप समिति बनायी गयी थी। कैलाष खैर की कम्पनी को 9.50 करोड़ का भुगतान होना है अब तक 50 प्रतिषत का भुगतान हो चुका है।

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