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प्रदूषण फैलाने वालों की खैर नहीं

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नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों की सूची तैयार

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देहरादून। उत्तराखण्ड में प्रदूषण फैलाने वालों की अब खैर नहीं। पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वालों पर उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एंव प्रदूषण नियत्रण वोर्ड ने कड़ी कार्रवाही का मन बना लिया है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा देहरादून सहित पूरे प्रदेश में सर्वे शुरू कराया जा चुका है। इस सर्वे में चिह्नित किए गए संस्थानों को जिन्होनें विभाग से एनओसी नहीं ली है। या फिर एनओसी लेने के बाद निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया है कार्रवाही करनी शुरू कर दी है। कई संस्थानों को नोटिस भेजे जा चुके हैं तो कई सीज भी किया गया है साथ ही कई सस्थानों पर कोर्ट द्वारा जुर्माना भी लगाया गया है।
होटलों, फैक्ट्रियों के साथ ही इस बार प्रदूषण नियत्रण बोर्ड के निशाने पर राज्य में तेजी से खुल रहे अस्पताल और नर्सिग होम और क्लीनिक भी हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट (मैनेजमेंट एंड डिस्पोजल) रूल्स 2016 के तहत बायोमेडिकल कचरे का निस्तारण न करने वाले प्रत्येक अस्पतालों पर 50 हजार रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति आरोपित करने का अधिकार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया गया है। बोर्ड द्वारा इसका उल्लंघन करने वाले अस्पतालों, नर्सिग होम व क्लीनिकों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है।
प्रदूषण नियत्रण बोर्ड ने पिछले दिनों राजा जी और कार्बेट पार्क के निकट 40 होटल- रिसॉर्ट्स को नोटिस जारी कर सीवरेज प्रबंधन और वाटर हार्वेस्टिंग सहित कई बिंदुओं पर जबाब मांगा था। नदियों, नालों में डाले जा रहे होटल, अस्पताल, फैक्ट्रियों के सीवरेज और अन्य कूडे को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राजधानी देहरादून के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार प्राथमिकता में है इसके साथ ही अन्य शहरों में भी चरणबद्व तरीके से कार्रवाही की जा रही है। पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले तमाम संस्थानों को नोटिस भी जारी कर दिये गयें हैं। उनसे कूड़ा निस्तारण, सीवरेज प्रबंधन, वाटर हार्वेस्टिंग जैसे बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती से होटल, अस्पताल, फैक्ट्रियों संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रदूषण के लिहाज से सबसे खराब हालत राजधानी देहरादून की है। राजधानी में आये दिन खुलने वाले अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट, गाडियों को साफ करने वाले वाशिंग सेंटर, जमकर नियमों की धज्जयिां उडा रहें हैं। देहरादून की बात करें तो रिस्पना और बिंदाल में रोजाना सात हजार करोड़ लीटर सीवर गिराया जाता है, जो सुसवा नदी और फिर गंगा तक पहुंचती हैं। देहरादून जिले की बात करें तो बड़ी संख्या में होटलों, अस्पतालों, फैक्ट्रियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सीवर और अन्य तरह का कूडा नदी, नालों के रास्ते गंगा तक पहुंचता है।
सबसे बड़ी कमी है होटल व रिसॉर्ट्स में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होना। साथ ही कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था न होने के साथ जैविक और अजैविक कचरे को अलग- अलग निस्तारण न करना इसके साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था भी इनमें देखने को नहीं मिलती है। पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दस से अधिक कमरों वाले होटल को नोटिस भेजे हैं। इनके लिए निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है। कमाल यह है कि अब तक राजनीति संरक्षण के चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई नहीं कर पा रहा था, लेकिन अब बोर्ड ने कार्रवाई को कमर कस ली है।

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