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नेशनल हाईवे 58 पूरी तरह केसरिया रंग में तब्दील

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शिव भक्त कांवडि़यों का गंगा जल लेकर लौटने का सिलसिला तेज

d 17श्रावन मास की शुरुआत से ही धर्मनगरी में कांवडि़यों का सैलाब उमडऩा शुरु हो गया था। चारों ओर बम- बम के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो रहा था। कांवडि़यों की रफ्तार के आगे धर्मनगरी की रफ्तार भी धीमी पड़ गई थी। अब जैसे जैसे शिवरात्री का पर्व नजदीक आता जा रहा है। वेसे ही देवनगरी हरिद्वार से गंगा मईया का पवित्र जल लेकर आ रहे कावडिया तेजी से अपनी मंजिल की और बढ़ रहे है।
भोले बाबा की धुन में रमे शिव भक्तों का गंगा जल लेकर लौटने का सिलसिला तेज हो चला है। कावडियों के सैलाब के चलते नेशनल हाईवे 58 पूरी तरह केसरिया रंग में तब्दील होने लगा है। नेशनल हाईवे पर हर तरफ कांवडिये ही कांवडिये नजर आ रहे हैं। पैरों में छाले, दर्द और जख्म होने के बावजूद भी वह अपनी मंजिल की ओर दौड़ते जा रहे हैं। साथ ही दिल्ली, हरियाणा, अल्वर और आसपास के जनपदों के लिए आने वाले डाक कांवडियों की भीड़ भी बढऩे लगी है। वहीं मनोकामना लेकर लौटने वाले कांवडिये कावंड़ लेकर आने शुरू हो गए है कावंडियों की भीड़ बढने के साथ शिव भक्तों की ओर से लगाए शिविरों की रौनक भी बढने लगी है। कांवड़ लेकर आने वाले शिव के भक्तों में केवल बाल कांवड़ या पुरुष नहीं हैं बल्कि किशोरी, युवतियां और महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं हैं। कंधे पर कांवड़, बदन पर भगवा रंग के वस्त्र और जुबां पर भोले बाबा का नाम लेते महिलाओं की संख्या कोई गोमुख से तो कोई हरिद्वार से गंगा जल लेकर आ रहा है । किसी ने बेटे की पढ़ाई ठीक से पूरी होने के लिए तो किसी ने अपने माँ-बाप के स्वास्थ्य के लिए कावड़ व जल लेकर अपनी मंजिल की ओर बम भोले का नाम लेकर बढ़ रहे शिव भक्तों की भले ही मुराद अलग-अलग हो लेकिन सबकी मंजिल एक है। बाबा भोलेनाथ पर पवित्र गंगा जल से जलाभिषेक कर बिगड़े काम बनाए जाएं।कांवड़ लेकर लौटने वालों में बाल कांवडियों की भी कमी नहीं है। 6 साल की आयु से लेकर किशोर तक सभी उम्र के कांवडिये अपनी टोली बनाकर नाचते गाते जल लेकर आ रहे हैं। शिवरात्रि नजदीक आते ही नेशनल हाईवे पर कांवडियों का जनसैलाब उमड़ पडा है। इस बार कांवडियो में देश भक्ति का जज्बा भी देखने को मिल रहा है कोई हाथ मे तिरंगा लेकर चल रहा तो कोई फौजियों के कपडे पहनकर। इतना ही नही कोई भगवान शिव को अपने कंधो पर बैठा कर ला रहा है, तो कोई अपनी माँ-बाप को कहते है माता पिता की सेवा से बढकर कोई धर्म नही होता, जो इनकी सेवा करता है वह स्वर्ग में जाता है।

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