नीरा शर्मा (बैम्बू लेडी)स्थानीय उत्पादों को आकर दे बना रही है खूबसूरत ज्वैलेरी

 

संजय चौहान-

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– राजमा, बांस, खजूर, रिंगाल,आडू व खुमानी की गुठलियां, इमली के बीज, गुलमोहर के बीज, चावल के दाने, सिंघाड़े, सुपारी और बैम्बू। किसी शो पीस में इनकी कल्पना हम शायद कर सकेंगे, लेकिन हमारे देश की एक ऐसी हुनरमंद भी हैं जो आसपास ही मिलने वाली इन प्राकृतिक चीज़ों से ऐसी खूबसूरत ज्वेलरी बना रही हैं जिसकी तारीफ देश-विदेश में हो रही है। सालों से ये उन गरीब गांव वालों को यह आर्ट सिखा रही हैं जो सुविधाओं से मुहाल हैं।

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जिस गांव भी पहुंचती हैं, उन्हीं गांव वालों के घरों में रहती हैं और उन्हें उनकी आजीविका चलाने के लिए यह हुनर सिखाती हैं। इनका कोई स्थायी पता नहीं। कहती हैं जाना तो सभी को एक ही जगह है, फिर ठिकाने का मोह क्या करना। असम की रहने वाली नीरा शर्मा।

पिछले 20 सालों से बैम्बू में फर्नीचर से लेकर फुटवियर्स, ज्वेलरी और आर्टिफैक्ट्स भी बना रही हैं। इसीलिए लोग उन्हें बैम्बू लेडी कहने लगे हैं। टीना अम्बानी भी इनकी क्लाइंट हैं। गुजरात सरकार इन्हें प्रोडक्शन हाउस देने को तैयार है।

धनाढ्य और बड़े-बड़े ज्वेलरी डिज़ाइनर हाउस इन्हें इस हुनर की मुंहमांगी कीमत देने पर आमादा है, लेकिन नीरा को यह मंज़ूर नहीं। वे यह कला सिर्फ उन्हें सिखा रही हैं जो सुविधाओं से मुहाल हैं,अशिक्षित, बेरोज़गार और पिछड़े क्षेत्रों में निवास करते हैं और जहाँ रोजगार के साधन बहुत कम है। ये हुनर के जरिये उन्हें आगे लाने के प्रति समर्पित हैं। उत्तराखंड में वन विकास निगम की पहल पर वे स्थानीय लोगों को स्थानीय उपलब्ध संसाधनों से ज्वेलरी बनाना सिखा रही है।

असम से आई इस महिला ने पहाड़ की महिलाओं को स्वरोजगार की नई राह दिखाई है। नीरा शर्मा ने अल्मोडा, नई टिहरी, उत्तरकाशी, खटीमा, पिथौरागढ के अलावा चमोली के पीपलकोटी, गरूड गंगा-पाखी में स्थानीय उत्पादों से श्रृंगार सामग्री तैयार कर स्थानीय लोगों को हैरत में डाल रखा है।

स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले रिंगाल, बांस, राजमा, विभिन्न फूलों की डालियों से मांग टीका, कान के झूमके, गुलोबंद, अंगूठी, श्रृंगार बाक्स जैसी तमाम सामग्री तैयार की है। वास्तव में नीरा शर्मा की ये पहल आने वाले दिनों लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे तो खोलेगें अपितु स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो पाएगा। इनका यह कार्य वास्तव में अनुकरणीय और काबिलेतारिफ है। नीरा शर्मा की पहल को सलाम ।

मशरूम युक्त उत्तराखंड की परिकल्पना को चरितार्थ करने व रोजगार सृजन के उद्देश्य हेतु देहरादून के मथोरावाला में सौम्या फूड प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी, पहाड़ी सोप और उत्तराखंड उद्यान विभाग के मशरूम संस्करण के सहयोग से 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक सुबह 9 बजे से 5 बजे तक 10 दिवसीय ”मशरूम जागरूकता शिविर” लगाया जा रहा है। इस शिविर मे लोगों को मशरूम उत्पादन व विपणन सम्बधित समस्त जानकारी दी जायेगी।

दीपावली के अवसर पर लोगों के लिए ये खास तोहफा है। बकौल मशरूम बिटिया दिव्या रावत जो भी लोग मशरूम उत्पादन मे रोजगार सृजन चाहते है तो जरूर इस कैम्प का लाभ उठाये तथा अधिक से अधिक लोगों को इस बारे मे बताइए। उत्तराखंड में पहली बार 10 दिवसीय मशरूम जागरूकता शिविर आयोजित हो रहा है जो मशरूमयुक्त उत्तराखंड की दिशा मे मील का पत्थर साबित होगा। मैं चाहती हूँ कि सूबे के कौने कौने से लोग इस कैम्प का लाभ उठाये।

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