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तिवारी को कमतर आंकना होगी राजनैतिक भूल

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देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने बीती बुधवार को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में अपना जन्मदिन धूमधाम के साथ मनाया। बुलावे बाद भी न तो प्रदेश के बड़े नेता और न ही यूपी के बड़े नेता तिवारी के जन्मदिन की पार्टी के अवसर पर उन्हें बधाई देने पहुंचे, उसे कांगे्रस और सपा की ओर से एक संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। जबकि बताया जाता है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत अन्य कुछ बड़े नेताओं तक को समारोह का बुलावा भेजा गया था। उत्तरप्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव समेत यूपी के कई बड़े नेताओं तक को जन्मदिन समारोह के अवसर पर बुलावा भेजा गया था। हालांकि इन दिनों यूपी और उत्तराखंड में सरकार अंतरकलह के दौर से गुजर रही है। बड़े नेताओं के तिवारी के जन्मदिन समारोह में शामिल न होने की एक वजह तो यह मानी जा रही। जबकि दूसरी और बड़ी वजह तिवारी का उम्रदराज होना और उनकी राजनैतिक पारी की समाप्ति होना माना जा रहा है। जिस तरह से जन्मदिन समारोह में प्रदेश के गिने चुने नेतागण ही शामिल हुए, उससे वयोवृद्घ नेता को भी कुछ न कुछ संदेश तो जरूर ही मिला होगा। जबकि बताया जाता है कि जन्मदिन समारोह के बहाने तिवारी अपने पुत्र रोहित शेखर तिवारी के राजनैतिक पारी की लांचिंग करना चाहते थे। जबकि बड़े नेताओं ने उनके जन्मदिन समारोह से दूरी बनाकर तिवारी के प्रति एक तरह से नाराजगी की झलक पेश कर दी है। हालांकि इन सबके बावजूद तिवारी के राजनैतिक कद को कम आंकना राजनैतिक दलों की बड़ी भूल भी हो सकती है।
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