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आपदा प्रभावितों के साथ सरकार हर कदम पर

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आपदा प्रभावितों के अध्ययन को तीन सदस्यीय आयोग का गठन होगाः सीएम

-सरकार का लक्ष्य- 2018 तक प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ा जाए
-गुप्तकाशी में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में लिया भाग
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रूद्रप्रयाग। धाद संस्थान द्वारा डा. जैक्सवीन नेशनल स्कूल में आयोजित आपदा प्रभावित बच्चों एवं विधवाओं के साथ दीपोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आपदा प्रभावितों के निरन्तर जीवन संघर्ष में सरकार उनके साथ है। कहा कि सरकार द्वारा आपदा प्रभावितों को स्वाबलम्बी बनाने में हर सम्भव प्रयास किया जायेगा। उन्हांेने कहा त्रासदी से पीडि़त घाटी के लोगों के सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक पक्षों के अध्ययन के लिए तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया जायेगा। आयोग द्वारा आगामी 10 वर्षो के लिए कार्य की रूपरेखा तैयार की जायेगी। मंदाकिनी संस्था को सरकार द्वारा वित्त तथा तकनीकी पोषण प्रदान किया जायेगा जिससे की लोग आगे की ओर अग्रसर हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 2018 तक प्रत्येक गांव को सडक से जोड़ा जाए। इसके लिए इस वित्तीय वर्ष में एक हजार सडकों पर कार्य किया जायेगा। कहा कि गांव की सडक तक पहंुच होने से गांव के उत्पादों को शहर में विक्रय कर गांव को लघु उत्पादन केन्द्र में तब्दील किया जायेगा। उन्होने उपस्थित ग्रामीणों से खेती, दस्तकारी, पशुपालन की ओर बढने को कहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गुप्तकाशी को नगर पंचायत, आपदा प्रभावित बहनों के लिए पेंशन शुरू करने की घोषणा की।
इस अवसर पर वी0के0 बहुगुणा द्वारा 02 बच्चों की आगे की शिक्षा के लिए बीस हजार रूपये का चैक धाद संस्था को प्रदान किया गया। श्री मनणा धाम तीर्थ यात्रियों द्वारा मुख्यमंत्री जी को स्मृति चिन्ह व प्रसाद भेंट किया गया। वर्ष 2013 की आपदा से केदार घाटी सहित जनपद रूद्रप्रयाग को उभारने व प्रदेश सशक्त नेतृत्व प्रदान कर विकास के मार्ग पर अग्रसर करने के लिए जैक्सवीन स्कूल द्वारा मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड जन नायक शिरोमणि सम्मान प्रदान किया गया।
माननीय मुख्य मंत्री द्वारा 2013 की आपदा से केदार घाटी को उभारने के लिए जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग डॉ0 राघव लंगर, प्रदेश भर में सामाजिक सरोकारों से जुडी धाद, फ्रेंडस ऑफ हिमालय संस्था को श्री केदारनाथ नवज्योति सम्मान प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस पर जैक्सवीन स्कूल को उत्तराखण्ड मित्र पुरस्कार प्रदान किया जायेगा। इस अवसर पर जिला निर्माण सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष सूरज नेगी, जिला पंचायत सदस्य संगीता नेगी, प्रमुख ऊखीमठ सन्तलाल, धाद संस्था के अध्यक्ष हर्षमणि व्यास, प्रेम बहुखण्डी, लखपत सिंह राणा सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, स्कूली बच्चे व भारी संख्या जनता उपस्थित थी। कार्यक्रम का संचालन रवीन्द्र सिंह नेगी द्वारा किया गया।

सीएम ने किया सम्मानित

प्रदेश के मुखिया हरीश रावत ने कहा कि राज्य के स्थापना दिवस पर नई पहल करते हुये उत्तराखंड मित्र पुरस्कार योजना शुरू की जा रही है, जिसमें क्षेत्र के विकास तथा विद्यालय में सहयोग प्रदान करने वाले डॉ जैक्सवीन को भी सम्मानित किया जायेगा। इस नाम को उन्होंने प्रस्तावित किया है। वहीं दूसरी ओर डॉ जैक्सवीन नेशनल स्कूल ने प्रदेश के मुखिया हरीश रावत को उनके विशिष्ट योगदान तथा केदारघाटी के संर्वागीण विकास में अहम योगदान देने पर उत्तराखंड जननायक शिरोमणि सम्मान से नवाजा। साथ ही जिलाधिकारी को श्री केदारनाथ नवज्योति सम्मान, राजेन्द्र गोस्वामी को उत्तराखंड लोक कला संस्कृति गौरव सम्मान, एसपी प्रहलाद नारायण मीणा को अतिथि सम्मान तथा कक्षा दसवीं के छात्र आयुष चौहान को भी सम्मानित किया गया।

आपदा पीडि़तों ने सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप

16-17 जून 2013 को केदारनाथ में आई आपदा से पीडित महिलाओं की स्थिति क्या है और सरकार ने जो वायदे उनके लिये किये थे, इसकी हकीकत षनिवार को तब देखने के लिये मिली, जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंची आपदा पीति महिलाओं ने खुले मंच से जनता के बीच अपनी पीड़ा सुनाई। महिलाओं ने यहां तक कह दिया कि रोजगार के नाम पर उन्हें मात्र कोरे आष्वासन दिये गये हैं। सरकार ने जनता के साथ विष्वासघात किया है। इसके लिये जनता कभी भी षासन-प्रषासन को माफ नहीं करेगी।
धाद संस्था की और से गुप्तकाषी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेष के मुख्यमंत्री हरीष रावत आपदा पीडि़त महिलाओं और बच्चों की समस्याएं सुनने आये थे। सीएम के आने से पूर्व आपदा पीडि़त महिलाओं को अपने विचार रखने को मौका दिया गया। सेमी भैंसारी की आपदा पीडि़त महिला सुमन देवी ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी मात्र खानापूर्ति करने के लिये गांव पहुंचते हैं। आपदा को तीन साल गुजर चुके हैं, लेकिन न तो गांव का विस्थापन हो पाया है और ना ही आपदा प्रभावितों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आपदा प्रभावितों को रोजगार देने का आष्वासन देकर उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाया है। क्यार्क बरसूड़ी की आपदा पीडि़त महिला लक्ष्मी देवी ने कहा कि आपदा में उन्होंने अपने पति, बेटे और पिता को खोया है। साथ ही गौरीकुंड में स्थित उनकी दुकान आपदा की भेंट चढ़ गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें रोजगार देने का आष्वासन दिया था, लेकिन आपदा के तीन वर्शों बाद भी रोजगार न मिलने से उनके सम्मुख बच्चों का लालन-पालन करने की समस्या खड़ी हो गई है। एक बुजुर्ग महिला षोबती देवी ने कहा कि वह 18 वर्श से वृद्ध पेंषन के लिये चक्कर लगा रही हैं, लेकिन आज तक उनकी पेंषन नहीं लग पाई है। अधिकारियों को बोलने वाला कोई नहीं है। अधिकारी-कर्मचारी अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। जगोठ गांव निवासी लक्ष्मी देवी ने कहा कि उनके लिये एक आवासीय कालोनी स्वीकृत होकर आई थी, लेकिन ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी ने यह कहकर आवासीय कालौनी के लिये आये पैंसो को वापस करा दिया कि आपदा में इन्हें सात लाख रूपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि वह आपदा पीडि़त महिला हैं। आय का कोई साधन नहीं है और प्रषासन एवं जनप्रतिनिधि उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। जयंती देवी ने कहा कि आपदा के नाम पर सरकारी धन का दुरूपयोग हुआ है। सरकार को विकास से कोई लेना-देना नहीं है। आपदा के नाम पर सरकार द्वारा कराये गये कार्यों की जांच होनी चाहिए। इस अवसर पर जब महिलाएं सीएम से मिली और अपनी समस्याएं सुनाई तो वह भावुक हो गई। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि यदि इसी प्रकार उनकी उपेक्षा होती रही तो वह उग्र आंदोलन कर लेंगे। जिस पर मुख्यमंत्री हरीष रावत ने कहा कि आपदा पीडि़त महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया जायेगा। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी को भी आपदा पीड़तों की समस्याओं का निराकरण करने के निर्देष दिये।

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